महाभारत 3.296.19
अनादृत्य तु तद्वाक्यं सहदेवः पिपासितःअपिबच्छीतलं तोयं पीत्वा च निपपात ह
anādṛtya tu tadvākyaṃ sahadevaḥ pipāsitaḥapibacchītalaṃ toyaṃ pītvā ca nipapāta ha
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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