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महाभारत 3.296.4
सहदेव उवाच · sahadeva uvāca
शकुनिस्त्वां यदाजैषीदक्षद्यूतेन भारतस मया न हतस्तत्र तेन प्राप्ताः स्म संशयम्
śakunistvāṃ yadājaiṣīdakṣadyūtena bhāratasa mayā na hatastatra tena prāptāḥ sma saṃśayam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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