महाभारत 3.297.69
तथैनं मनुजाः प्राहुर्भीमसेनं प्रियं तवअथ केनानुभावेन सापत्नं जीवमिच्छसि
tathainaṃ manujāḥ prāhurbhīmasenaṃ priyaṃ tavaatha kenānubhāvena sāpatnaṃ jīvamicchasi
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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