महाभारत 3.297.6
यस्य कार्यमकार्यं वा सममेव भवत्युतकस्तस्य विश्वसेद्वीरो दुर्मतेरकृतात्मनः
yasya kāryamakāryaṃ vā samameva bhavatyutakastasya viśvasedvīro durmaterakṛtātmanaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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