महाभारत 3.297.9एकैकशश्चौघबलानिमान्पुरुषसत्तमान्कोऽन्यः प्रतिसमासेत कालान्तकयमादृतेekaikaśaścaughabalānimānpuruṣasattamānko'nyaḥ pratisamāseta kālāntakayamādṛteइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें