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महाभारत 3.298.24
धर्म उवाच · dharma uvāca
उपपन्नो गुणैः सर्वैः स्वभावेनासि पाण्डवभवान्धर्मः पुनश्चैव यथोक्तं ते भविष्यति
upapanno guṇaiḥ sarvaiḥ svabhāvenāsi pāṇḍavabhavāndharmaḥ punaścaiva yathoktaṃ te bhaviṣyati
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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