महाभारत 3.298.7
यशः सत्यं दमः शौचमार्जवं ह्रीरचापलम्दानं तपो ब्रह्मचर्यमित्येतास्तनवो मम
yaśaḥ satyaṃ damaḥ śaucamārjavaṃ hrīracāpalamdānaṃ tapo brahmacaryamityetāstanavo mama
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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