महाभारत 3.3.17
धौम्येन तु यथ प्रोक्तं पार्थाय सुमहात्मनेनाम्नामष्टशतं पुण्यं तच्छृणुष्व महामते
dhaumyena tu yatha proktaṃ pārthāya sumahātmanenāmnāmaṣṭaśataṃ puṇyaṃ tacchṛṇuṣva mahāmate
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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