महाभारत 3.3.22
कृतं त्रेता द्वापरश्च कलिः सर्वामराश्रयःकला काष्ठा मुहूर्ताश्च पक्षा मासा ऋतुस्तथा
kṛtaṃ tretā dvāparaśca kaliḥ sarvāmarāśrayaḥkalā kāṣṭhā muhūrtāśca pakṣā māsā ṛtustathā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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