महाभारत 3.3.27
द्वादशात्मारविन्दाक्षः पिता माता पितामहःस्वर्गद्वारं प्रजाद्वारं मोक्षद्वारं त्रिविष्टपम्
dvādaśātmāravindākṣaḥ pitā mātā pitāmahaḥsvargadvāraṃ prajādvāraṃ mokṣadvāraṃ triviṣṭapam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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