Loading
महाभारत 3.3.28
देहकर्ता प्रशान्तात्मा विश्वात्मा विश्वतोमुखःचराचरात्मा सूक्ष्मात्मा मैत्रेण वपुषान्वितः
dehakartā praśāntātmā viśvātmā viśvatomukhaḥcarācarātmā sūkṣmātmā maitreṇa vapuṣānvitaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें