महाभारत 3.3.29
एतद्वै कीर्तनीयस्य सूर्यस्यैव महात्मनःनाम्नामष्टशतं पुण्यं शक्रेणोक्तं महात्मना
etadvai kīrtanīyasya sūryasyaiva mahātmanaḥnāmnāmaṣṭaśataṃ puṇyaṃ śakreṇoktaṃ mahātmanā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें