महाभारत 3.30.13
तस्माद्बलवता चैव दुर्बलेन च नित्यदाक्षन्तव्यं पुरुषेणाहुरापत्स्वपि विजानता
tasmādbalavatā caiva durbalena ca nityadākṣantavyaṃ puruṣeṇāhurāpatsvapi vijānatā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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