महाभारत 3.30.41
क्षन्तव्यमेव सततं पुरुषेण विजानतायदा हि क्षमते सर्वं ब्रह्म संपद्यते तदा
kṣantavyameva satataṃ puruṣeṇa vijānatāyadā hi kṣamate sarvaṃ brahma saṃpadyate tadā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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