महाभारत 3.30.46
सोमदत्तो युयुत्सुश्च द्रोणपुत्रस्तथैव चपितामहश्च नो व्यासः शमं वदति नित्यशः
somadatto yuyutsuśca droṇaputrastathaiva capitāmahaśca no vyāsaḥ śamaṃ vadati nityaśaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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