महाभारत 3.31.11
ब्राह्मणाः सर्वकामैस्ते सततं पार्थ तर्पिताःयतयो मोक्षिणश्चैव गृहस्थाश्चैव भारत
brāhmaṇāḥ sarvakāmaiste satataṃ pārtha tarpitāḥyatayo mokṣiṇaścaiva gṛhasthāścaiva bhārata
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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