महाभारत 3.32.8
वेदाध्यायी धर्मपरः कुले जातो यशस्विनिस्थविरेषु स योक्तव्यो राजभिर्धर्मचारिभिः
vedādhyāyī dharmaparaḥ kule jāto yaśasvinisthavireṣu sa yoktavyo rājabhirdharmacāribhiḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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