महाभारत 3.33.3
कर्म खल्विह कर्तव्यं जातेनामित्रकर्शनअकर्माणो हि जीवन्ति स्थावरा नेतरे जनाः
karma khalviha kartavyaṃ jātenāmitrakarśanaakarmāṇo hi jīvanti sthāvarā netare janāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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