महाभारत 3.34.11
अथैनामन्ववेक्षस्व मृगचर्यामिवात्मनःअवीराचरितां राजन्न बलस्थैर्निषेविताम्
athaināmanvavekṣasva mṛgacaryāmivātmanaḥavīrācaritāṃ rājanna balasthairniṣevitām
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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