महाभारत 3.34.13
भवान्धर्मो धर्म इति सततं व्रतकर्शितःकच्चिद्राजन्न निर्वेदादापन्नः क्लीबजीविकाम्
bhavāndharmo dharma iti satataṃ vratakarśitaḥkaccidrājanna nirvedādāpannaḥ klībajīvikām
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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