महाभारत 3.34.15
स भवान्दृष्टिमाञ्शक्तः पश्यन्नात्मनि पौरुषम्आनृशंस्यपरो राजन्नानर्थमवबुध्यसे
sa bhavāndṛṣṭimāñśaktaḥ paśyannātmani pauruṣamānṛśaṃsyaparo rājannānarthamavabudhyase
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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