महाभारत 3.34.33
इमाञ्शकुनिकान्राजन्हन्ति वैतंसिको यथाएतद्रूपमधर्मस्य भूतेषु च विहिंसताम्
imāñśakunikānrājanhanti vaitaṃsiko yathāetadrūpamadharmasya bhūteṣu ca vihiṃsatām
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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