Loading
महाभारत 3.34.35
व्यक्तं ते विदितो राजन्नर्थो द्रव्यपरिग्रहःप्रकृतिं चापि वेत्थास्य विकृतिं चापि भूयसीम्
vyaktaṃ te vidito rājannartho dravyaparigrahaḥprakṛtiṃ cāpi vetthāsya vikṛtiṃ cāpi bhūyasīm
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें