महाभारत 3.34.51
उदारमेव विद्वांसो धर्मं प्राहुर्मनीषिणःउदारं प्रतिपद्यस्व नावरे स्थातुमर्हसि
udārameva vidvāṃso dharmaṃ prāhurmanīṣiṇaḥudāraṃ pratipadyasva nāvare sthātumarhasi
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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