महाभारत 3.34.63
अर्थत्यागो हि कार्यः स्यादर्थं श्रेयांसमिच्छताबीजौपम्येन कौन्तेय मा ते भूदत्र संशयः
arthatyāgo hi kāryaḥ syādarthaṃ śreyāṃsamicchatābījaupamyena kaunteya mā te bhūdatra saṃśayaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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