महाभारत 3.34.73
इदमभ्यधिकं राजन्ब्राह्मणा गुरवश्च तेसमेताः कथयन्तीह मुदिताः सत्यसंधताम्
idamabhyadhikaṃ rājanbrāhmaṇā guravaśca tesametāḥ kathayantīha muditāḥ satyasaṃdhatām
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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