महाभारत 3.34.80स भवान्रथमास्थाय सर्वोपकरणान्वितम्त्वरमाणोऽभिनिर्यातु चिरमर्थोपपादकम्sa bhavānrathamāsthāya sarvopakaraṇānvitamtvaramāṇo'bhiniryātu ciramarthopapādakamइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें