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महाभारत 3.35.19
यदा हि पूर्वं निकृतो निकृत्या; वैरं सपुष्पं सफलं विदित्वामहागुणं हरति हि पौरुषेण; तदा वीरो जीवति जीवलोके
yadā hi pūrvaṃ nikṛto nikṛtyā; vairaṃ sapuṣpaṃ saphalaṃ viditvāmahāguṇaṃ harati hi pauruṣeṇa; tadā vīro jīvati jīvaloke
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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