महाभारत 3.36.26
पुण्यकीर्ती राजपुत्री द्रौपदी वीरसूरियम्विश्रुता कथमज्ञाता कृष्णा पार्थ चरिष्यति
puṇyakīrtī rājaputrī draupadī vīrasūriyamviśrutā kathamajñātā kṛṣṇā pārtha cariṣyati
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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