महाभारत 3.36.5प्रतीक्षमाणान्कालो नः समा राजंस्त्रयोदशआयुषोऽपचयं कृत्वा मरणायोपनेष्यतिpratīkṣamāṇānkālo naḥ samā rājaṃstrayodaśaāyuṣo'pacayaṃ kṛtvā maraṇāyopaneṣyatiइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें