महाभारत 3.37.15
सर्वे दिव्यास्त्रविद्वांसः सर्वे धर्मपरायणाःअजेयाश्चेति मे बुद्धिरपि देवैः सवासवैः
sarve divyāstravidvāṃsaḥ sarve dharmaparāyaṇāḥajeyāśceti me buddhirapi devaiḥ savāsavaiḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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