महाभारत 3.37.38
तमन्वयुर्महाराज शिक्षाक्षरविदस्तथाब्राह्मणास्तपसा युक्ता देवेन्द्रमृषयो यथा
tamanvayurmahārāja śikṣākṣaravidastathābrāhmaṇāstapasā yuktā devendramṛṣayo yathā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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