महाभारत 3.37.3एवमेतन्महाबाहो यथा वदसि भारतइदमन्यत्समाधत्स्व वाक्यं मे वाक्यकोविदevametanmahābāho yathā vadasi bhārataidamanyatsamādhatsva vākyaṃ me vākyakovidaइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें