महाभारत 3.37.6
त्वं तु केवलचापल्याद्बलदर्पोच्छ्रितः स्वयम्आरब्धव्यमिदं कर्म मन्यसे शृणु तत्र मे
tvaṃ tu kevalacāpalyādbaladarpocchritaḥ svayamārabdhavyamidaṃ karma manyase śṛṇu tatra me
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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