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महाभारत 3.38.8
अद्य चेयं मही कृत्स्ना दुर्योधनवशानुगात्वयि व्यपाश्रयोऽस्माकं त्वयि भारः समाहितःतत्र कृत्यं प्रपश्यामि प्राप्तकालमरिंदम
adya ceyaṃ mahī kṛtsnā duryodhanavaśānugātvayi vyapāśrayo'smākaṃ tvayi bhāraḥ samāhitaḥtatra kṛtyaṃ prapaśyāmi prāptakālamariṃdama
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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