महाभारत 3.40.21
इत्युक्तः पाण्डवेयेन किरातः प्रहसन्निवउवाच श्लक्ष्णया वाचा पाण्डवं सव्यसाचिनम्
ityuktaḥ pāṇḍaveyena kirātaḥ prahasannivauvāca ślakṣṇayā vācā pāṇḍavaṃ savyasācinam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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