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महाभारत 3.40.23
दोषान्स्वान्नार्हसेऽन्यस्मै वक्तुं स्वबलदर्पितःअभिषक्तोऽस्मि मन्दात्मन्न मे जीवन्विमोक्ष्यसे
doṣānsvānnārhase'nyasmai vaktuṃ svabaladarpitaḥabhiṣakto'smi mandātmanna me jīvanvimokṣyase
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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