महाभारत 3.40.2कैरातं वेषमास्थाय काञ्चनद्रुमसंनिभम्विभ्राजमानो वपुषा गिरिर्मेरुरिवापरःkairātaṃ veṣamāsthāya kāñcanadrumasaṃnibhamvibhrājamāno vapuṣā girirmerurivāparaḥइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें