महाभारत 3.40.31
न हि मद्बाणजालानामुत्सृष्टानां सहस्रशःशक्तोऽन्यः सहितुं वेगमृते देवं पिनाकिनम्
na hi madbāṇajālānāmutsṛṣṭānāṃ sahasraśaḥśakto'nyaḥ sahituṃ vegamṛte devaṃ pinākinam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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