महाभारत 3.40.34
तान्प्रसन्नेन मनसा भगवाँल्लोकभावनःशूलपाणिः प्रत्यगृह्णाच्छिलावर्षमिवाचलः
tānprasannena manasā bhagavām̐llokabhāvanaḥśūlapāṇiḥ pratyagṛhṇācchilāvarṣamivācalaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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