महाभारत 3.40.39
संप्रायुध्यद्धनुष्कोट्या कौन्तेयः परवीरहातदप्यस्य धनुर्दिव्यं जग्रास गिरिगोचरः
saṃprāyudhyaddhanuṣkoṭyā kaunteyaḥ paravīrahātadapyasya dhanurdivyaṃ jagrāsa girigocaraḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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