महाभारत 3.40.3
श्रीमद्धनुरुपादाय शरांश्चाशीविषोपमान्निष्पपात महार्चिष्मान्दहन्कक्षमिवानलः
śrīmaddhanurupādāya śarāṃścāśīviṣopamānniṣpapāta mahārciṣmāndahankakṣamivānalaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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