महाभारत 3.40.44ततः शक्राशनिसमैर्मुष्टिभिर्भृशदारुणैःकिरातरूपी भगवानर्दयामास फल्गुनम्tataḥ śakrāśanisamairmuṣṭibhirbhṛśadāruṇaiḥkirātarūpī bhagavānardayāmāsa phalgunamइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें