महाभारत 3.40.58
भवगद्दर्शनाकाङ्क्षी प्राप्तोऽस्मीमं महागिरिम्दयितं तव देवेश तापसालयमुत्तमम्
bhavagaddarśanākāṅkṣī prāpto'smīmaṃ mahāgirimdayitaṃ tava deveśa tāpasālayamuttamam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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