महाभारत 3.40.60
कृतो मया यदज्ञानाद्विमर्दोऽयं त्वया सहशरणं संप्रपन्नाय तत्क्षमस्वाद्य शंकर
kṛto mayā yadajñānādvimardo'yaṃ tvayā sahaśaraṇaṃ saṃprapannāya tatkṣamasvādya śaṃkara
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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