महाभारत 3.40.7
स संनिकर्षमागम्य पार्थस्याक्लिष्टकर्मणःमूकं नाम दितेः पुत्रं ददर्शाद्भुतदर्शनम्
sa saṃnikarṣamāgamya pārthasyākliṣṭakarmaṇaḥmūkaṃ nāma diteḥ putraṃ dadarśādbhutadarśanam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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