महाभारत 3.42.10दण्डपाणिरचिन्त्यात्मा सर्वभूतविनाशकृत्वैवस्वतो धर्मराजो विमानेनावभासयन्daṇḍapāṇiracintyātmā sarvabhūtavināśakṛtvaivasvato dharmarājo vimānenāvabhāsayanइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें