महाभारत 3.42.39
तान्दृष्ट्वा लोकपालांस्तु समेतान्गिरिमूर्धनिजगाम विस्मयं धीमान्कुन्तीपुत्रो धनंजयः
tāndṛṣṭvā lokapālāṃstu sametāngirimūrdhanijagāma vismayaṃ dhīmānkuntīputro dhanaṃjayaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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