महाभारत 3.42.4
कृतार्थं चावगच्छामि परमात्मानमात्मनाशत्रूंश्च विजितान्सर्वान्निर्वृत्तं च प्रयोजनम्
kṛtārthaṃ cāvagacchāmi paramātmānamātmanāśatrūṃśca vijitānsarvānnirvṛttaṃ ca prayojanam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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