महाभारत 3.43.23
त्वत्प्रसादात्सदा शैल ब्राह्मणाः क्षत्रिया विशःस्वर्गं प्राप्ताश्चरन्ति स्म देवैः सह गतव्यथाः
tvatprasādātsadā śaila brāhmaṇāḥ kṣatriyā viśaḥsvargaṃ prāptāścaranti sma devaiḥ saha gatavyathāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें